पंजाब में करते थे मजदूरी, अब बिहार के खेतों में लाखों की उपजा रहे चेरी

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पटना. रोजी-रोटी के लिए पंजाब गया था मजदूरी करने। वहां चेरी के खेतों में काम किया। फिर अपने पुत्र गुड्डू के साथ ब्रजकिशोर मेहता ने अपने गांव औरंगाबाद जिले के कुटुंबा प्रखंड के चिल्कीबीघा में ही चेरी की खेती करने की ठान ली। पिछले साल 13 कट्ठा यानी एक बीघा से भी कम जमीन पर चेरी लगाई। इससे करीब चार लाख रुपए की कमाई हुई। इस साल उन्होंने 2 बीघा खेत में चेरी लगाई है।

बिहार में किसी किसान ने व्यावसायिक तौर पर पहली बार चेरी की खेती की है। इससे प्रभावित अन्य किसान भी चेरी की खेती का मन बनाने लगे हैं। कृषि विभाग भी चेरी की खेती को बढ़ावा देने के लिए योजना बना रहा है।चटख लाल रंग और खट्टे-मीठे स्वाद वाली चेरी ने किसान ब्रजकिशोर मेहता की तकदीर ही बदल दी। इसे देख उनके चाचा रघुपत मेहता ने भी इस साल एक बीघा में लगाई है। चेरी की खेती के लिए फिलहाल योजना नहीं है। उद्यान उप निदेशक डॉ. श्रीकांत ने बताया कि अनुदानित दर पर सिंचाई के लिए ड्रिप इरीगेशन और सेड नेट और मेल्टिंग आदि की सुविधाएं किसान को दिलाई गई है। औरंगाबाद के डीएम ने भी इसके लिए योजना बनाने के लिए कहा है।

सितंबर-अक्टूबर में लगते हैं पौधे
ब्रजकिशोर मेहता ने बताया कि एक कट्ठा में चेरी के एक हजार पौधे लगाए जाते हैं। इस तरह एक बीघा में 20 हजार पौधे लगा रहे हैं। एक बीघा में 50 क्विंटल चेरी का उत्पादन होता है। जैविक विधि से खेती कर रहे हैं। इससे चेरी अधिक दिनों तक सुरक्षित रहता है। साथ ही पौधे भी अधिक दिनों तक बेहतर रहते हैं। सितंबर-अक्टूबर में पौधे लगाए जाते हैं, जबकि जनवरी से मार्च तक चेरी का उत्पादन होता है।

खेत से 200 व बाजार में 400 रुपए किलो चेरी : किसान खुद पैकिंग कर पटना, बोकारो और कोलकाता के बाजारों में चेरी भेज रहे हैं।
किसानों के खेतों से 200 रुपए किलो की दर से चेरी बेची जाती है, जबकि बाजार में खुदरा दुकानदार 400 से 500 रुपए किलो की दर से चेरी बेचते हैं। ब्रजकिशोर बताते हैं कि एक एकड़ की खेती में करीब एक लाख रुपए खर्च होता है और 7 से 8 लाख रुपए की कमाई होती है।

महाबालेश्वर व पंजाब से लाते हैं पौधे : ब्रजकिशोर से बताया कि पहले पंजाब से ही 7 पौधे लाकर अपने खेत में लगाया। बेहतर रिजल्ट के बाद 13 कट्ठे में लगाया। अब इसका क्षेत्र बढ़ रहा है। इसके पौधे से ही तना काटकर लत्तर तैयार कर खेतों में लगाया जाता है। महाराष्ट्र के महाबालेश्वर और पंजाब से इसके पौधे मंगाए जाते हैं। हालांकि, किसान खुद भी पौधे तैयार करने लगे हैं। एक पौधे की कीमत 10 रुपए है।

कृषि अपर निदेशक अभांशु सी जैन ने बताया कि बिहार में चेरी की खेती की भरपूर संभावना है। यह सेहत के साथ किसानों के लिए धन कमाने का भी खजाना है। चेरी की खेती को बढ़ावा देने के लिए योजना बनाई जाएगी। आरकेवीवाई या अन्य किसी योजना के तहत चेरी की खेती करने वाले किसानों को सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा। राज्य में पहली बार किसी किसान ने इस प्रकार की चेरी की खेती की है।

Source: Bhaskar.com

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