किसानी छोड़ कारोबारी बने थे ये, फोर्ब्स की टॉप 50 लिस्ट में आ चुका है नाम

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जहानाबाद: देश की श्रेष्ठ दवा कंपनियों में शुमार एल्केम ग्रुप के चेयरमैन संप्रदा सिंह किसान के बेटे हैं। कुछ साल पहले फोर्ब्स मैग्जीन के सौ धनकुबेरों की सूची में 45वें नंबर पर थे। उन्होंने अपनी जिद से न सिर्फ खुद की किस्मत संवारी, बल्कि साढ़े आठ हजारों लोगों को रोजगार देकर युवाओं के लिए आज प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

साल 1950 में उन्होंने गया काॅलेज से बीकाॅम की परीक्षा पास की। औसत दर्जे का स्टूडेंट लेकिन अव्वल दर्जे की सोच हमेशा साथ रखते थे।
औसत दर्जे का छात्र रहने की वजह से उन्होंने किसी बड़ी नौकरी का इंतजार किए बगैर खेती शुरू कर दी। खेती करना शुरू किया तो उस साल सुखाड़ होने की वजह से उनकी खेती में लगी पूंजी भी डूब गई। इधर, गांव व समाज के लोगों ने पढ़-लिखकर खेती में उनकी पसंद पर ताने कसने शुरू कर दिए। तानों से तंग उनका मन गांव से बाहर निकल भाग्य आजमाने की कोशिश में जुट गए।

खेती की, फिर छाता, कपड़ा व दवा भी बेची। दवा दुकान चलाते-चलाते विभिन्न कंपनियों के बड़े अधिकारियों व सेल्स मैनेजरों से उनकी मुलाकात होती रही। उनके करीब रहते-रहते उन्होंने दवा उत्पादन व्यवसाय की बारीकियों को काफी हद तक समझ लिया था। पूंजी की कमी को राह में बाधक नहीं बनने दिया।

1970 में अपनी दवा कंपनी डालने मुंबई पहुंच गए। वहां उन्होंने महेंद्र प्रसाद व एक अन्य मित्र से संपर्क साधा। एरिस्टो फार्मा के नाम से कंपनी का काम शुरू हो गया। तीन हिस्सेदारों वाली इस कंपनी में महेंद्र प्रसाद का हिस्सा सबसे अधिक था। एक साल में ही संप्रदा व महेंद्र प्रसाद के बीच मतभेद हो गया। 1973 में उन्होंने खुद की कंपनी एल्केम लैबोरेट्रीज की शुरुआत की। एल्केम लैबोरेट्रीज की एक्सक्लूसिव दवाओं का प्रोडक्ट बाजार धीरे-धीरे विश्व के कई देशों में छा गया। अपने व्यवसाय के सिलसिले में संप्रदा सिंह ने अमेरिका, रूस, इंग्लैंड, फ्रांस, आॅस्ट्रेलिया आदि देशों में यात्रा कर व्यवसायिक प्रतिभा का डंका बजाया।

Source: Bhaskar.com

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