यूनिवर्सिटी ने फाइन आर्ट्स में एडमिशन से किया था मना, आज विदेश तक फेमस

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नवादा. बात तीन दशक पुरानी है। बिहार के नवादा जिले के पकरीबरावां प्रखंड के कोननपुर गांव के नरेंद्रपाल सिंह ने आईएससी पास किया था। उसने बैचलर आफ फाइन आर्ट्स इन पेंटिंग में एडमिशन के लिए पटना यूनिवर्सिटी के कालेज आफ आर्ट एंड क्राफ्ट में आवेदन दिया था। तत्कालीन प्राचार्य ने साइंस का विद्यार्थी होने के कारण उन्हें एडमिशन लेने से इनकार कर दिया।

प्राचार्य का तर्क था- साइंस के छात्र आर्ट के क्षेत्र में ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकते। आर्टिस्ट की एक सीट बेकार चली जाएगी। अगले साल नरेंद्रपाल ने फिर प्रयास किया। निराशा हाथ लगी। तीसरे प्रयास में उनका दाखिला तब हुआ जब वह जानबूझकर केमिस्ट्री में फेल कर गए। नरेंद्रपाल कहते हैं कि उनका बचपन से चित्रकार बनने का सपना था। नरेंद्रपाल का जिद ही थी कि आज वे देश के प्रमुख चित्रकारों में हैं। उनके चित्र भारत के अलावा पांच देशों में प्रदर्शित हो चुके हैं। नरेंद्रपाल के चित्रों का प्रदर्शन शिकागो (अमेरिका), बर्लिन (जर्मनी), बार्सिलोना (स्पेन), साउथ कोरिया व इटली में हुआ।

पिछले साल चेक गणराज्य के प्राग नेशनल गैलरी में ‘ओरिएंटल एंड टेंपररी- द आर्ट आफ एशिया’ की प्रदर्शनी में उनका चित्र शामिल हुआ। प्राग के नेशनल गैलरी में किसी भारतीय के लिए पहला अवसर है। खास ये कि जिन देशों में नरेंद्रपाल के चित्रों की प्रदर्शनी हुई, उसका खर्च भी आयोजक देशों ने उठाया। नरेंद्रपाल के मुताबिक, मार्च-अप्रैल में इटली में प्रदर्शनी लगाई जाएगी। यही नहीं, नरेंद्रपाल की जिद ने प्राचार्य की अवधारणा को बदल दिया। प्राचार्य पांडेय सुरेंद्र जी के रिटायरमेंट के बाद लखनऊ में जब नरेंद्रपाल से मुलाकात हुई तब उन्होंने गले लगाकर आशीर्वाद दिया।

नरेंद्रपाल ने अमूर्तन चित्रशैली की अमिट छाप छोड़ी है। इसमें संकेत के जरिए चित्रण किया गया है। इसका ‘दृष्टिकोण’ नाम दिया गया है। नरेंद्रपाल ने सर्कस, नायिका, लुकिंग ग्लास जैसे दर्जनों सीरिज के जरिए देश दुनिया में पहचान बनाई। इटली के फ्रेडरिको फैलिनी पर आधारित ला-डोक्चे-बिटा यानी स्वीट लाइफ पर उनकी चित्रकारी ने काफी ख्याति दिलाई।

सम्मान मिले तो मिलते चले गए
पिछले साल बिहार के खेल, युवा और संस्कृति मंत्रालय ने नरेंद्रपाल को वरिष्ठ चित्रकार राधामोहन प्रसाद अवार्ड से सम्मानित किया है। उन्हें एक्रिलिक पेंटिंग के लिए नार्दर्न रीजन अवार्ड मिल चुका है। उन्हें बिहार यंग जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने बिहार श्री का अवार्ड दिया। वह आल इंडिया पेंटिंग जज कमेटी के मेंबर रहे हैं। ऐसे सम्मानों की सूची लंबी है।

Source: Bhaskar.com

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